नई दिल्ली। आम जनता की रसोई का बजट एक बार फिर बड़ी खबर के केंद्र में है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एलपीजी और पीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका गहराती जा रही है। क्या हुआ हर महीने की पहली तारीख को इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां एलपीजी सिलेंडर और ईंधन की नई कीमतें जारी करती हैं। जुलाई में भी दरों में संशोधन हुआ था, और अब अगस्त की नई दरों पर सबकी नजरें टिकी हैं। बड़ा कारण विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका द्वारा ईरान पर हाल में किए गए हवाई हमलों के बाद कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी सप्लाई संबंधी दिक्कतों के चलते कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी वैश्विक तनाव का सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने का बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है। महत्व घरेलू और कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में बदलाव का सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट के साथ-साथ रेस्तरां और छोटे व्यवसायों की लागत पर भी पड़ता है। आगे क्या तेल कंपनियों की ओर से अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।