नई दिल्ली। स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप को ईएमआई पर खरीदने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़ी राहत भरी खबर दी है। अब लोन की एक किस्त चूकते ही डिवाइस को अचानक रिमोट तरीके से बंद कर देने की मनमानी नहीं चल सकेगी। क्यों बनाना पड़ा नया नियम हाल के वर्षों में ईएमआई डिफॉल्ट होते ही फाइनेंस कंपनियों द्वारा फोन या लैपटॉप को रिमोट तरीके से लॉक कर देने की घटनाएं तेजी से बढ़ी थीं, जिससे ग्राहकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि लेंडर्स को अपनी बकाया रकम वसूलने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल ग्राहकों पर अनुचित दबाव बनाने या गलत तरीके से वसूली के हथियार के तौर पर नहीं किया जा सकता। किन डिवाइस पर लागू होगा यह नियम नए नियम के दायरे में सिर्फ वही डिवाइस आएंगे, जिनकी खरीद के लिए खास तौर पर लोन लिया गया हो। यानी अगर किसी ग्राहक ने पर्सनल लोन या कोई अन्य सामान्य लोन लिया है, जो सीधे किसी स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप की खरीद से नहीं जुड़ा, तो उस डिवाइस को कर्ज वसूली के लिए रिमोट तरीके से लॉक करना संभव नहीं होगा। 30 दिन से पहले नहीं लगेगा कोई प्रतिबंध आरबीआई ने डिवाइस पर पाबंदी लगाने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया तय की है। किस्त चूकते ही डिवाइस को तुरंत बंद नहीं किया जा सकेगा। किसी भी तरह की पाबंदी की शुरुआत तभी हो सकेगी, जब लोन खाता कम से कम 30 दिन से ओवरड्यू हो चुका हो, जबकि डिवाइस को पूरी तरह लॉक करने की अनुमति सिर्फ 60 दिन की देरी के बाद ही मिलेगी। रिजर्व बैंक ने साफ निर्देश दिया है कि लेंडर्स शुरुआत में ही पूरा डिवाइस बंद करने के बजाय धीरे-धीरे प्रतिबंध लागू करें। इमरजेंसी सुविधाएं बंद नहीं होंगी डिवाइस पर पाबंदी लगने के बाद भी कुछ जरूरी सुविधाएं हमेशा चालू रखनी होंगी। इनमें इनकमिंग कॉल, एसएमएस और एसओएस जैसी आपातकालीन सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा नौकरी या काम-धंधे के लिए जरूरी फीचर्स को भी बंद नहीं किया जा सकेगा, ताकि किस्त में देरी होने पर भी ग्राहक पूरी तरह संपर्क और अपने जरूरी कामकाज से कटे नहीं। निजी डेटा तक पहुंच पर पूरी तरह रोक नए फ्रेमवर्क में ग्राहकों की प्राइवेसी का भी खास ख्याल रखा गया है। डिवाइस पर पाबंदी के दौरान बैंक या लेंडर कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो, वीडियो, मैसेज, कॉल लॉग, लोकेशन हिस्ट्री या किसी भी अन्य निजी जानकारी तक पहुंच नहीं बना सकेंगे। यानी लॉकिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ लोन वसूली तक सीमित रहेगा, ग्राहक की निजी जिंदगी में झांकने के लिए इसका दुरुपयोग नहीं हो सकेगा। लोन लेते वक्त ही देनी होगी पूरी जानकारी लेंडर को कर्ज मंजूर करते समय ग्राहक को यह स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य होगा कि किस्त न चुकाने की स्थिति में डिवाइस पर रिमोट पाबंदी लगाई जा सकती है। साथ ही, कोई भी पाबंदी लगाने से पहले ग्राहक को पूर्व सूचना देना भी जरूरी होगा, ताकि उसे पहले से अंदाजा रहे कि डिफॉल्ट होने पर क्या कार्रवाई हो सकती है। देरी पर मिलेगा हर घंटे मुआवजा सबसे अहम प्रावधान यह है कि अगर ग्राहक पूरा बकाया चुका देता है, तो लेंडर को डिवाइस पर लगी पाबंदी तुरंत हटानी होगी। अगर भुगतान के बावजूद डिवाइस समय पर अनलॉक नहीं किया जाता, तो संबंधित बैंक या रेगुलेटेड कंपनी को हर घंटे की देरी के लिए ग्राहक को 250 रुपये का मुआवजा चुकाना पड़ेगा। यह पूरा फ्रेमवर्क 1 जनवरी 2027 से देशभर में लागू होगा। SEO टैग्स: RBI EMI नियम, डिवाइस लॉक नियम, स्मार्टफोन ईएमआई, RBI नया फ्रेमवर्क, EMI डिफॉल्ट कानून, मुआवजा नियम RBI, बैंकिंग न्यूज़ हिंदी मेटा डिस्क्रिप्शन: RBI ने EMI पर खरीदे फोन-लैपटॉप के लिए नए नियम बनाए, तय समय पर अनलॉक न होने पर मिलेगा हर घंटे 250 रुपये मुआवजा, जानें पूरी डिटेल।