मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस और बीजेपी नेता ईशा कोप्पिकर एक बार फिर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस के केंद्र में हैं। इस बार मामला जुड़ा है देशभक्ति और लोकतंत्र को लेकर उनकी हालिया टिप्पणियों पर मिली आलोचना और ट्रोलिंग से, जिस पर एक्ट्रेस ने खुलकर और बेबाकी से जवाब दिया है। ट्रोल्स को दिया दो टूक जवाब लोकतंत्र से जुड़े अपने बयानों पर मिल रही आलोचना के बीच ईशा कोप्पिकर ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि अगर अपने देश से प्यार करना उन्हें किसी टैग में बांध देता है, तो उन्हें इसकी परवाह नहीं। एक्ट्रेस ने आगे लिखा कि वे माफी मांगने के बजाय गर्व से यह स्वीकार करेंगी कि हां, वे अंधभक्त हैं और भारत भक्त भी हैं। इसके साथ ही उन्होंने एक और पोस्ट री-शेयर की, जिसमें कहा गया था कि भाजपा का विरोध करना देशद्रोह नहीं है, लेकिन सिर्फ भाजपा का विरोध करने के लिए देश-विरोधी तत्वों का समर्थन करना जरूर देशद्रोह के समान है। पहले भी सेलिब्रिटीज़ की चुप्पी पर रखी थी राय गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं जब ईशा कोप्पिकर सोशल मीडिया पर अपने विचारों को लेकर चर्चा में आई हों। इससे पहले नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान बॉलीवुड सितारों की कथित चुप्पी पर उठे सवालों के जवाब में भी उन्होंने अपनी बात रखी थी। उस समय एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा था कि हर व्यक्ति की अपनी भूमिका होती है और सेलिब्रिटीज़ का काम हर मुद्दे पर आवाज़ उठाना नहीं है, न ही वे फैसले लेने वाली संस्थाओं और अधिकारियों की जगह ले सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी खामोशी को लापरवाही न समझा जाए, क्योंकि कई बार यह सोच-समझकर लिया गया फैसला होता है। जिम्मेदार बर्ताव पर दिया जोर उसी वीडियो में ईशा ने यह भी कहा था कि 'तानाशाही' जैसे शब्द का इस्तेमाल आजकल बहुत आसानी से किया जाने लगा है, जबकि लोकतंत्र का मतलब सिर्फ अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं, बल्कि उस आज़ादी के साथ जिम्मेदारी निभाना भी है। उनके अनुसार सिर्फ नारे लगाने या आवाज़ उठाने से बदलाव नहीं आता, बल्कि सही समय पर लिए गए सही फैसलों और उनके असरदार क्रियान्वयन से ही असली बदलाव संभव है। पृष्ठभूमि: जंतर-मंतर विवाद से जुड़ा है पूरा मामला यह पूरी बहस उस दौर में शुरू हुई थी, जब नीट यूजी पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल की घटनाएं सामने आई थीं। इस विवाद के बाद खुद प्रधानमंत्री मोदी ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि गाली-गलौज से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता और भटके हुए युवाओं को सजा देने के बजाय उन्हें सही राह दिखाई जानी चाहिए। सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया ईशा कोप्पिकर के इन बयानों पर सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रिया बंटी हुई रही। जहां कुछ लोगों ने उनके साहस और स्पष्टवादिता की तारीफ की, वहीं कुछ यूजर्स ने तंज कसते हुए यह भी पूछा कि क्या उन्हें भाजपा से इस समर्थन के बदले कोई फायदा मिल रहा है। बावजूद इसके, एक्ट्रेस अपने रुख पर अडिग नजर आईं और उन्होंने ट्रोलिंग को नजरअंदाज करते हुए अपनी बात दोहराई।