देहरादून। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर योगगुरु बाबा रामदेव ने ध्वजारोहण के बाद एक बेहद तीखा और चर्चा में आने वाला बयान दिया है। उन्होंने सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया, शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सीधे सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। नौकरियों में 99 प्रतिशत तक घोटाले का आरोप मीडिया से बातचीत में बाबा रामदेव ने कहा कि देश में चारों तरफ हंगामा मचा हुआ है और सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू के दौरान 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला होता है। उनका आरोप था कि भर्तियों में अपनी जाति, वर्ग, समुदाय और विचारधारा के लोगों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि पैसे लेकर योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर दिया जाता है। उन्होंने इसे न सिर्फ अपमानजनक बताया, बल्कि लोकतंत्र की भावना के खिलाफ भी करार दिया। उनके मुताबिक एक तरफ देश 'सत्यमेव जयते' यानी सत्य की जीत की बात करता है, तो दूसरी तरफ पहले से तय करके करोड़ों रुपये लेकर नौकरियां बेची जा रही हैं। बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी उठाई आवाज़ योगगुरु ने सिर्फ भर्ती प्रक्रिया तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने छोटे स्कूल-कॉलेजों में शिक्षकों, बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी की तरफ भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि परीक्षा परिणामों में गड़बड़ियों की शिकायतें छात्रों के भविष्य के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो रही हैं, और बच्चों को अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ने का उचित मौका मिलना ही चाहिए। जेन-जी आंदोलन को दिया खुला समर्थन इस बयान की सबसे खास बात यह रही कि बाबा रामदेव ने खुलकर जेन-जी और जेन अल्फा छात्रों के चल रहे आंदोलन का समर्थन किया। गौरतलब है कि पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी खामियों को लेकर जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले पहले भी बड़ा विरोध प्रदर्शन हो चुका है, जिसमें शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया में सुधार सहित कई मांगें उठाई गई थीं। बाबा रामदेव का यह ताजा बयान उसी छात्र असंतोष की एक तरह से पुष्टि करता नजर आया। चेतावनी के साथ जताई सधी हुई राय हालांकि बाबा रामदेव ने अपने बयान में यह भी साफ किया कि वे किसी तरह की अराजकता के समर्थक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश में गड़बड़ियां और घपले बहुत हैं, इसलिए व्यवस्था को समय रहते सुधारना जरूरी है, अन्यथा आगे और बड़े आंदोलन होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने चुटीले अंदाज़ में कहा कि व्यवस्था को सुधरना होगा, वरना ऐसी नौबत भी आ सकती है कि उन्हें खुद आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़े। राजनेताओं से एकजुटता की अपील अपने संबोधन में योगगुरु ने देश के राजनेताओं से भी सीधी अपील की। उन्होंने कहा कि नेताओं को आपस में लड़ने की बजाय देशहित में मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक संवाद में संयम बरतने और जाति-धर्म के नाम पर समाज में विभाजन फैलाने से बचने की भी नसीहत दी। महत्व स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर बाबा रामदेव जैसे प्रभावशाली सार्वजनिक चेहरे की ओर से भर्ती भ्रष्टाचार और छात्र आंदोलन के समर्थन में आया यह बयान शिक्षा और रोजगार प्रणाली में सुधार की मांग को और बल दे सकता है, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस और तेज होने की संभावना है।