नई दिल्ली। पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न से जुड़े बहुचर्चित मामले में सोमवार को बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं। जंतर-मंतर के धरने से शुरू हुआ था विवाद इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2023 की शुरुआत में हुई थी, जब देश के कई नामचीन और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला था। पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक धरना दिया और उन्हें पद से हटाने के साथ-साथ गिरफ्तार करने की मांग उठाई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद अप्रैल 2023 में दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण के खिलाफ दो अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज की थीं। इनमें से एक FIR नाबालिग पहलवान की शिकायत पर पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुई थी, जबकि दूसरी अन्य बालिग महिला पहलवानों के आरोपों पर आधारित थी। नाबालिग गवाह का बयान वापस लेना बना सबसे बड़ा मोड़ केस में सबसे निर्णायक मोड़ तब आया जब नाबालिग पहलवान और उसके परिवार ने अपने शुरुआती आरोपों से पीछे हटने का फैसला किया। दिल्ली पुलिस ने अदालत में पेश की गई करीब 550 पन्नों की रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि पॉक्सो से जुड़े आरोपों की पुष्टि के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिले। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने कोर्ट से पॉक्सो के मामले को रद्द करने की सिफारिश की, जो पूरी तरह पीड़िता और उसके पिता द्वारा दोबारा दिए गए बयानों पर आधारित थी। नाबालिग ने अपने नए बयान में बताया कि कड़ी मेहनत के बावजूद चयन न होने पर वह गहरी निराशा और मानसिक तनाव से गुजर रही थी, और इसी गुस्से तथा पक्षपात के एहसास के चलते उसने शिकायत दर्ज कराई थी। इसी बदले हुए बयान और सबूतों की कमी के आधार पर पुलिस ने कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। बालिग पहलवानों के केस में भी सबूतों का अभाव नाबालिग का मामला समाप्त होने के बाद बालिग पहलवानों की शिकायत पर आधारित केस की सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट में जारी रही। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर 10 मई 2024 को बृजभूषण सिंह पर आरोप तय किए गए थे, जिसके बाद ट्रायल औपचारिक रूप से शुरू हुआ। अभियोजन पक्ष ने मई 2026 में अपने सबूत पेश करने से पहले सुनवाई के दौरान कुल 32 गवाहों से पूछताछ की। जून में आरोपियों के बयान दर्ज किए गए, जिसके बाद अंतिम बहस हुई, जो 2 जुलाई 2026 को पूरी हुई। बृजभूषण सिंह इस दौरान 20 जुलाई 2023 से लगातार नियमित जमानत पर चल रहे थे और उन्होंने शुरू से ही सभी आरोपों से इनकार किया था। अदालत का अंतिम फैसला कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में असमर्थ रहा। शिकायतकर्ताओं के बयानों में मौजूद विरोधाभास और सबूतों की कमी को आधार बनाते हुए अदालत ने उन्हें बरी करने का आदेश सुनाया।