नई दिल्ली। देश में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस ने सोमवार को एक नया मोड़ ले लिया। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंथा नागेश्वरन ने सुझाव दिया है कि E20 के साथ कम एथनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल, जैसे E10, भी पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे पुराने वाहनों के मालिकों की चिंताएं कम हो सकती हैं। E20 के बीच E10 की वापसी की क्यों उठी मांग भारत में 20 फीसदी एथनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया और 1 अप्रैल 2026 से देशभर के पेट्रोल पंपों पर यही मानक पेट्रोल विकल्प बन गया। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण घटाना है। लेकिन E20 को लेकर वाहन मालिकों की तरफ से माइलेज, वाहन प्रदर्शन और पुराने वाहनों के कुछ पुर्जों की अनुकूलता को लेकर लगातार चिंताएं सामने आती रही हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने क्या कहा वी. अनंथा नागेश्वरन ने एक लेख में सुझाव दिया कि E20 के साथ E10 जैसा कम एथनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जा सकता है। उनका तर्क है कि अगर ग्राहकों को अपनी गाड़ी के हिसाब से E10 या E20 चुनने का विकल्प मिले तो मौजूदा सार्वजनिक चिंता काफी हद तक कम हो सकती है। यह लेख उन्होंने आर्थिक मामलों के विभाग के सलाहकार आकाश पूजारी के साथ लिखा है और इसमें व्यक्त विचारों को व्यक्तिगत बताया गया है। सबसे जरूरी बात—E10 अभी वापस नहीं आया मुख्य आर्थिक सलाहकार के सुझाव को E10 की वापसी का सरकारी फैसला समझना सही नहीं होगा। केंद्र सरकार ने पिछले महीने कहा था कि E0 या E10 जैसे कम एथनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल पर वापस जाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। इसलिए अभी पेट्रोल पंपों पर E10 की उपलब्धता को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। पुरानी गाड़ियों को लेकर चिंता क्यों E20 को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा पुराने वाहनों को लेकर है। सरकार के दिसंबर 2025 के लोकसभा जवाब के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 से पहले बेचे गए वाहन E10 के अनुरूप थे, जबकि उसके बाद बेचे गए वाहनों को E20 सामग्री के अनुरूप बनाया गया। सरकार ने यह भी कहा था कि E20 से जुड़े सुरक्षा मानक BIS और Automotive Industry Standards के तहत निर्धारित हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार के लेख में भी पुराने दोपहिया वाहनों पर विशेष ध्यान दिया गया है। Reuters के अनुसार, भारत में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन हैं और इनमें कुछ पुराने रबर सील ऐसे हो सकते हैं जिन्हें ज्यादा एथनॉल वाले ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। इन्हें बदलने या retrofit करने की प्रक्रिया में समय लग सकता है। क्या E20 से इंजन खराब हो रहे हैं? यहां तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। E20 को लेकर सोशल मीडिया पर इंजन खराब होने और माइलेज में भारी गिरावट के कई दावे सामने आए हैं, लेकिन सरकार और ऑटो इंडस्ट्री ने व्यापक स्तर पर E20 से इंजन फेल होने का प्रमाण नहीं माना है। जुलाई 2026 में सरकार ने भी E20 से जुड़े कई दावों पर स्पष्टीकरण जारी किया था। सरकार के अनुसार, पुराने वाहनों में कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट सामान्य ईंधन की तुलना में पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन इसे नियमित सर्विसिंग के दौरान संभाला जा सकता है। E20 विवाद के बीच ऑटो कंपनियों की चिंता भी सामने आई E10 की मांग ऐसे समय आई है जब E20 को लेकर ऑटो इंडस्ट्री की आंतरिक चिंताओं की रिपोर्ट भी सामने आई हैं। Reuters ने पिछले सप्ताह रिपोर्ट किया था कि कुछ प्रमुख वाहन कंपनियों के आंतरिक संवाद में E20 के कुछ नमूनों में क्लोराइड और नमी की मात्रा को लेकर चिंता जताई गई थी। हालांकि बाद में उद्योग संगठन SIAM ने अपनी शिकायत वापस ले ली थी और इस मुद्दे पर अलग-अलग पक्षों की ओर से स्पष्टीकरण भी सामने आए। सरकार का E20 पर अब तक क्या रुख रहा है सरकार E20 नीति को ऊर्जा सुरक्षा, तेल आयात कम करने और उत्सर्जन घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानती रही है। आधिकारिक दस्तावेजों में कहा गया है कि E20 के लिए वाहन और ईंधन संबंधी मानक निर्धारित हैं तथा वाहन निर्माताओं को अपने वाहनों की E20 compatibility बतानी होती है। अब आगे क्या होगा? मुख्य आर्थिक सलाहकार का सुझाव सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार पुराने वाहनों के लिए E10 को दोबारा विकल्प के रूप में उपलब्ध कराने पर विचार करेगी। फिलहाल इसका जवाब हां नहीं है। सरकार की ओर से E10 को वापस लाने की कोई नई घोषणा नहीं हुई है। अगर E10 और E20 दोनों विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं, तो पुराने और नए वाहनों के मालिक अपनी गाड़ी की compatibility के अनुसार ईंधन चुन सकेंगे। लेकिन इसके लिए अलग ईंधन की supply, storage और distribution व्यवस्था की जरूरत होगी। वाहन मालिकों के लिए अभी क्या मतलब है? फिलहाल वाहन मालिकों को E10 की वापसी का इंतजार करने के बजाय अपनी गाड़ी की manufacturer-recommended fuel compatibility जांचनी चाहिए। खासकर 1 अप्रैल 2023 से पहले बिके वाहनों के मामले में वाहन के manual, fuel sticker या निर्माता की आधिकारिक जानकारी देखना ज्यादा सुरक्षित रहेगा। सरकार के अनुसार वाहन की E20 compatibility निर्माता द्वारा स्पष्ट की जानी चाहिए। E20 पर बहस अभी खत्म नहीं हुई E20 को लेकर सरकार का लक्ष्य तेल आयात और प्रदूषण कम करना है, जबकि दूसरी तरफ पुराने वाहन मालिक compatibility और लागत को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अब मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा E10 को भी विकल्प के तौर पर उपलब्ध कराने का सुझाव इस बहस को एक नया मोड़ देता है। हालांकि फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है—E10 वापस लाने का सुझाव आया है, फैसला नहीं। आने वाले दिनों में सरकार इस सुझाव पर क्या रुख अपनाती है, इस पर करोड़ों वाहन मालिकों की नजर रहेगी।