मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ से पुलिस हिरासत में कथित बर्बरता का एक गंभीर और विवादित मामला सामने आया है, जिसने प्रदेश की सियासत में भी हलचल मचा दी है। भारतीय किसान यूनियन (बीआर अंबेडकर) के अध्यक्ष दिग्विजय भाटी ने मेरठ के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अविनाश पांडे और सिविल लाइंस थाना प्रभारी पर थर्ड-डिग्री टॉर्चर का गंभीर आरोप लगाया है। एसएसपी दफ्तर जाने से शुरू हुआ पूरा मामला पुलिस के मुताबिक 19 अगस्त 2026 को दिग्विजय भाटी और उनके साथी मोहित जाटव, ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़े अपने खिलाफ दर्ज मामलों पर चर्चा करने के लिए सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। भाटी के मुताबिक वहीं एसएसपी कार्यालय में उनके साथ बदसलूकी और मारपीट शुरू हुई, जो बाद में थाने के भीतर यातना तक जा पहुंची। गाने पर बार-बार नचवाने का आरोप भाटी और मोहित जाटव के मुताबिक कप्तान के दफ्तर से सिविल लाइन थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ उन दोनों को एसओजी दफ्तर ले गए, जहां पहले उनके हाथ-पैर एक-दूसरे से बंधवाए गए और बुरी तरह पीटा गया। इसके बाद इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ ने मोबाइल पर फिल्म 'खलनायक' का गाना 'चोली के पीछे क्या है' बजाकर पहले दिग्विजय भाटी को नचवाया, फिर मोहित जाटव से भी गाना गाने और नाचने को कहा गया। भाटी के मुताबिक बुरी तरह पिटाई के बाद वे दोनों बमुश्किल हाथ हिला पा रहे थे, इसके बावजूद सिर पर कपड़ा डालकर बार-बार नचाया गया। आंख में गंभीर चोट, जबरन लिखवाया एक्सीडेंट का बयान दिग्विजय भाटी का यह भी आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें जूतों, घूंसों और लातों से पीटा, जिससे उनकी आंख पर गंभीर सूजन और चोट के निशान आ गए। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद पुलिस ने उनसे जबरन एक सफेद कागज पर यह लिखवाया कि उन्हें ये चोटें सड़क दुर्घटना में लगी हैं। पुलिस का पक्ष- रास्ते में हुआ हादसा वहीं पुलिस विभाग ने आरोपों को खारिज करते हुए अपना अलग पक्ष रखा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोनों की कहासुनी सिर्फ ऑफिस में हुई थी, जिसके बाद वे वहां से चले गए और घर लौटते समय उनका स्कूटर फिसल गया, जिससे वे गिरकर घायल हो गए। पुलिस का कहना है कि इस बारे में दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने खुद ही शाम 5 बजकर 31 मिनट पर सिविल लाइंस थाने में एक लिखित आवेदन देकर घटना दर्ज कराई थी। अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयानों ने बढ़ाया संदेह इस मामले को और उलझाने वाली बात यह रही कि खुद पुलिस अधिकारियों के बयान आपस में मेल नहीं खाते। जहां एडीजी ने यह स्वीकार किया कि एसएसपी कार्यालय में वाद-विवाद और हंगामे के दौरान हिंसा हुई थी, वहीं मेरठ एसएसपी का दावा रहा कि पूरी घटना कार्यालय के बाहर रास्ते में हुई। अधिकारियों के इन विरोधाभासी बयानों ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कड़ी आपत्ति जताई और भाजपा सरकार पर निशाना साधा। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि पुलिस हिरासत में हुई यह बर्बरता सामान्य पुलिसिंग नहीं, बल्कि वर्दी की ताकत का खुला दुरुपयोग है और यह कानून-व्यवस्था तथा पुलिस जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कांग्रेस ने भी भाटी की सूजी हुई आंख और चोटों का हवाला देते हुए सरकार के रवैये को अस्वीकार्य बताया। नए एसएसपी ने की बड़ी कार्रवाई मामले ने तूल पकड़ने के बाद गुरुवार देर रात एसएसपी अविनाश पांडे का तबादला कर दिया गया। इसके बाद नवनियुक्त एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने इस पूरे प्रकरण में सख्त कदम उठाते हुए सिविल लाइंस थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ समेत कुल आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। महत्व यह पूरा मामला पुलिस हिरासत में मानवाधिकारों की रक्षा और वर्दी की जवाबदेही से जुड़े गंभीर सवाल खड़ा करता है। अधिकारियों के परस्पर विरोधाभासी बयान इस मामले की निष्पक्ष जांच को और जरूरी बना देते हैं।