महंत बालक देवाचार्य ने पौराणिक प्रसंगों का हवाला देते हुए कहा कि रावण और कालनेमी ने भी साधु का वेश धारण कर छल करने का प्रयास किया था, जिसका परिणाम उन्हें दंड के रूप में भुगतना पड़ा। वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पप्पू यादव द्वारा साधु का वेश बनाए जाने पर संत समाज ने केवल कानून का सहारा लेते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने अखिलेश यादव पर बिना आधार और तथ्यों के मरे हुए रावण से जुड़ी बातें करने का आरोप लगाया। राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे की कथित हेराफेरी के आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए महंत ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में अब तक किसी भी साधु-संत का नाम सामने नहीं आया है। जिन लोगों पर भी आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ विधिवत एफआईआर दर्ज हो चुकी है और संबंधित जांच एजेंसियां निष्पक्षता से अपना काम कर रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच पूरी होने पर सच्चाई सबके सामने आ जाएगी। अंत में उन्होंने नसीहत दी कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं को भ्रामक बयानबाजी से बचना चाहिए ताकि समाज में अनावश्यक भ्रम की स्थिति पैदा न हो।