नई दिल्ली। साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण अब बस कुछ ही दिन दूर है। यह खगोलीय घटना 12 अगस्त को श्रावण मास की अमावस्या तिथि पर घटित होगी, और खास बात यह है कि इसी दिन हरियाली तीज का पावन पर्व भी मनाया जाएगा। कब शुरू होगा और कब होगा समाप्त ज्योतिष के अनुसार यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा और अगले दिन यानी 13 अगस्त की देर रात 1 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगा। इस तरह ग्रहण की पूरी अवधि आधी रात के आसपास केंद्रित रहेगी। भारत में नहीं दिखेगा यह नजारा यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। दुनिया के कुछ खास हिस्सों में ही इसे पूर्ण रूप से देखा जा सकेगा, जिनमें ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, अटलांटिक महासागर क्षेत्र तथा स्पेन और पुर्तगाल के कुछ इलाके शामिल हैं। इसके अलावा फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी और इटली में यह आंशिक रूप से नजर आएगा। भारत में सूतक काल लागू होगा या नहीं चूंकि यह ग्रहण भारतीय भूभाग से दिखाई नहीं देगा, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इसका सीधा मतलब है कि मंदिरों के कपाट अपने सामान्य निर्धारित समय पर ही खुलेंगे और बंद होंगे, और ग्रहण का असर मंदिरों की दैनिक पूजा-व्यवस्था पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा। किन राशियों पर पड़ेगा खास प्रभाव यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में लगने जा रहा है, इसलिए ज्योतिष के अनुसार कर्क राशि के जातकों और आश्लेषा नक्षत्र में जन्मे लोगों को इस दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि माना जाता है कि इसका हल्का-फुल्का असर सभी बारह राशियों पर किसी न किसी रूप में देखने को मिल सकता है। घबराने की जरूरत नहीं, दिनचर्या रखें सामान्य चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देगा, इसलिए यहां रहने वाले लोगों को किसी तरह की घबराहट या भय की आवश्यकता नहीं है। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक लोग अपनी दिनचर्या पूरी तरह सामान्य रूप से जारी रख सकते हैं। हरियाली तीज और शिव पूजा का विशेष महत्व इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह हरियाली तीज और अमावस्या दोनों का संयोग लेकर आ रहा है। सावन मास में वैसे भी भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन शिव मंदिर जाकर जलाभिषेक किया जा सकता है। संभव हो तो पूजा में गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, पुष्प और चंदन अर्पित करना शुभ माना जाता है, वहीं अगर यह सब उपलब्ध न हो तो सिर्फ जल और बेलपत्र चढ़ाकर भी सच्चे मन से पूजा की जा सकती है। मंत्र जाप से मिलेगी मानसिक शांति इस विशेष दिन पर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप बेहद फलदायी माना जाता है। रुद्राक्ष की माला से 11 माला जाप करने की सलाह दी जाती है, जिससे मानसिक शांति मिलने के साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा का असर भी कम होता है।