नई दिल्ली। अब तक घर पर खुद की बिजली बनाने का सबसे लोकप्रिय जरिया सोलर पैनल ही रहा है, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी हैं - रात में और बादल छाए रहने पर यह काम करना बंद कर देता है। जर्मनी की एक कंपनी ने अब इसी कमी को पूरा करने के लिए एक दिलचस्प विकल्प पेश किया है, जो छत पर सोलर पैनल की जगह घेरे बिना भी बिजली बना सकता है। आखिर क्या है यह नई तकनीक यह तकनीक असल में बड़ी पवन चक्कियों का ही एक छोटा और हल्का रूप है, जिसे खासतौर पर घरेलू इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है। बड़ी विंडमिलों के उलट इसे सीधे घर की छत पर लगाया जा सकता है, और खेतों या बिजली ग्रिड से दूर इलाकों में भी इसे आसानी से इंस्टॉल किया जा सकता है। इसके भीतर लगे हवा को काटने वाले खास एयरोडायनामिक ब्लेड घूमकर जनरेटर के जरिए बिजली बनाते हैं, जो इन्वर्टर के माध्यम से सीधे घर के इलेक्ट्रिक सिस्टम से जुड़ जाती है। यानी धूप हो या न हो, यह डिवाइस बिजली बनाना जारी रखता है। जर्मन कंपनी SkyWind Energy की खास पहल इस माइक्रो विंड टरबाइन को जर्मनी की SkyWind Energy नाम की कंपनी ने विकसित किया है। कंपनी का दावा है कि एक अकेली टरबाइन 1 किलोवाट तक बिजली बना सकती है, और अगर जरूरत ज्यादा बिजली की हो तो कई टरबाइन को आपस में जोड़कर उनकी क्षमता को और बढ़ाया जा सकता है। पारंपरिक पवन चक्कियां आमतौर पर काफी बड़ी और भारी-भरकम होती हैं, लेकिन यह माइक्रो वर्जन इतना कॉम्पैक्ट है कि आसानी से घर की छत पर फिट हो जाता है और ज्यादा जगह भी नहीं घेरता। कैसे होती है छत पर फिटिंग इसे घर की छत पर लगाना भी अपेक्षाकृत आसान बताया जा रहा है। एक मजबूत पोल और क्लैंप की मदद से टरबाइन को छत पर कसकर फिट किया जाता है, जिसके बाद टरबाइन से बनने वाली बिजली को इन्वर्टर के जरिए सीधे घर के मुख्य डिस्ट्रीब्यूशन पैनल से जोड़ दिया जाता है। कितनी बिजली बना सकती है यह टरबाइन कंपनी के मुताबिक अगर किसी इलाके में हवा की रफ्तार ठीक-ठाक बनी रहे, तो एक सिंगल टरबाइन 1000 वॉट यानी 1 किलोवाट तक की बिजली पैदा कर सकती है। ऐसे इलाकों में जहां हवा अच्छी खासी मात्रा में उपलब्ध रहती है, वहां यह टरबाइन सालाना औसतन करीब 615 यूनिट (kWh) तक बिजली बना सकती है। सुरक्षा को लेकर भी रखा गया पूरा ख्याल इस डिवाइस को बनाते वक्त सुरक्षा का भी खास ध्यान रखा गया है। तेज आंधी-तूफान या ओवरलोड की स्थिति में सिस्टम को नुकसान से बचाने के लिए इसमें एक खास डंप लोड और कंट्रोलर लगाया गया है, जो ब्लेड्स की रफ्तार को नियंत्रित कर घर के बाकी उपकरणों को सुरक्षित रखता है। इसके अलावा कंपनी ने ब्लेड्स को खास कंप्यूटर डिजाइनिंग के जरिए इस तरह तैयार किया है कि टरबाइन चलते वक्त लगभग कोई आवाज़ नहीं करती, जिससे इसे रिहायशी इलाकों में भी बेझिझक लगाया जा सकता है। सोलर पैनल की जगह लेगी या साथ निभाएगी? सबसे अहम सवाल यही है कि क्या यह तकनीक सोलर पैनल की जगह ले सकती है? विशेषज्ञों की राय में इसे सोलर पैनल का विकल्प मानने के बजाय एक बेहतरीन साथी के तौर पर देखा जाना चाहिए। सोलर पैनल रात में या कम धूप की स्थिति में बिजली बनाने में सक्षम नहीं होते और छत पर ज्यादा जगह भी घेरते हैं। दूसरी तरफ विंड टरबाइन को भी बेहतर आउटपुट के लिए अच्छी हवा की जरूरत पड़ती है, और शहरी इलाकों में ऊंची इमारतों के कारण हवा का बहाव कई बार कम हो सकता है। ऐसे में जिन घरों में सोलर पैनल दिन में बिजली बना रहे हों, वहीं यह टरबाइन रात या कम धूप के समय काम करके बिजली की कमी को पूरा कर सकती है, जिससे दोनों तकनीकें मिलकर घर को ज्यादा भरोसेमंद बिजली सप्लाई दे सकती हैं।